Water Crisis in India - जल संकट समस्या हिंदी मे

भारत कर सकते हे एक भयानक जल संकट का सामना, जानिए समस्या और समाधान के बारे मे।

Water Crisis in India - जल संकट समस्या हिंदी मे
पुरी दुनिया का सिर्फ 3% पानी पीने लायक हे बाकी 97% समन्दर का पानी हे। जिसे पीने लायक करने मे बोहत ख़र्च हे।
आज के दीन मे हम एक गभिर संकट के क़रीब हे। जिस संकट का नाम हे जल संकट। हमारे भारत मे 70 प्रतिशत हित्सा पानी से घिरा हुआ हे। लेकिन आज चेन्नई जैसे शहर पानी के समस्या से जुझ रहा था। बिहार, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश मे भी गभिर जल संकट का खतरा मंडरा रहा हे। लेकिन अभी तक हमारे नींद नेही खुली हे। नेता लॉग वोट लेके सब कुछ भूल जाते हे। और हम भी उन्हें ऐसे ही छोड़ देते हे। मीडिया की बात ही अलग हे। बो तो हिन्दू - मुस्लिम डिबेट करने मे ब्यस्त हे। इसलिए अबाज आपको ही उठाना पड़ेगा। आप अपने समस्या का अबाज खुद उठाइए। नेही तो एक दीन ये समस्या गंभीर रूप लेकर आएगी।

नीति आयोग की रिपोर्ट क्या कहता हे जल समस्या को लेकर

भारत सरकार के संस्थान नीति आयोग एक रिपोर्ट हाल ही मे निकाला हे पानी के समस्या को लेकर। नीति आयोग के मुताबिक भारत मे 60 क्रोड़ लॉग पानी के समस्या मे हे। जो की बोहत बड़ी population है। आज हम जिस स्पीड से जमीन के अंदर का पानी निकाल रहा हे बो बोहत चीन्ता दायक हे। नीति आयोग के मुताबिक 2020 तक 21 शहर का ग्राउंड वाटर खत्म हौ जाएगी। इस लिस्ट मे हमारा राजधानी New दिल्ली भी समिल हे। साथ ही साथ ये कहा गया की साल 2030 तक देश की 40% लोगो को साफ़ पानी मिलना भी मुशकिल हो जाएगा। नीति आयोग के अकड़ो के अनुसार हर साल 2 लाख लॉग पानी के बजेह से मर जाति हे।

ये रिपोर्ट बोहत ही भयानक हे इसलिए हमें कुछ करना चाहिए। सरकार ने अकेला कुछ नेही कर सकती आपका भी सहयोग चाहिए सरकार को। हमें हल ही मे चेन्नई मे पानी का संकट भूलना नेही चाहिए।

इस समस्या से कैसे निकला जा सकते

इस समस्या से निकलने के लिए हमे बोहत कुछ करना पड़ेगा। इसलिए आज मे आपको कुछ बड़े उपाय बाता रहा हु जो आपको और हमें करना चाहिए। क्यूँ की इस दुनिया मे 3 भाग जल जरुर हे लेकिन पूरे दुनिया का 97% पानी समन्दर का हे जो पीने लायक नेही हे। मात्र 3% पानी पीने लायक हे जिसे रक्षा करना दुनिया का हर एक नागरिक का कर्त्यब्य हे।

1. नदी, नाले और तालाबो के उपर ध्यान रखना

आज के दीन मे बोहत सारे नदी और तालाब सुख चुके हे और सुखने के कागार पर हे। जो जो नदी या तालाब खातरे मे हे उसे पुनार्जिबित करना पड़ेगा। बहा पोल्यूशन मत फैलाइए। नदी के जमीन पर किसीका कब्जा ना हौ पाए इसका खास ध्यान रखिए, नदी या तालाब के आसपास पेड़ लगाइए और परिस्कार रखिए। ध्यान रखिए सभी बड़े बड़े शेहर नदी के पास ही हे। नदी एक बोहत बड़ी सोर्स हे पीने लायक पानी का।

2. नदी के पानी का समन्दर मे जाने से पेहले इस्तेमाल करने की कौशिस करना होगा

हमारे देश मे बोहत सारे नादिओ का पानी समन्दर मे बेकार चले जाति हे। क्यूँ की हाम उस पर इतना ध्यान नेही देते। लेकिन हम सबको इस पर ध्यान देना चाहिए। नदी के पानी समन्दर मे जाने से पेहले जितना हौ सके उतना हमें इस्तेमाल कर लेना चाहे। इसलिए हमें नदी के ऊपर बाँध देना पड़ेगा। ये पानी बोहत काम आयेगी जैसे की किसानो की खेती करने मे, बड़े शेहर मे, विद्युत उत्पादन मे इत्यादि।

3. बारिश का पानी जमा करना होगा

मणिपुर राज्य से भी छोटा हे इजराइल देश जिसका एवरेज annual Rainfall हे 30 millimeters लेकिन ये राष्ट्र मे पानी का संकट नेही आता हे। क्यूँ की याहा पर बारिश के जल का सही इस्तेमाल किया जाता हे। हमें इस छोटासा देश से सीखना चाहिए कैसे ये बारिश के जल का संरक्षन करती हे। हमारे याहा तो इजराइल से तुलना मे बोहत ज्यादा बारिश होती हे लेकिन भारत मे पानी का संकट दिखाइ देती हे। क्यूँ की हम पानी को फ़ालतू मे बर्बाद करते हे। इसलिए हमे बारिश के पानी को टैंक, तालाब इत्यादि मे संग्रह करके रखना चाहिए।

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4. पानी बर्बाद होने से रोकना होगा

हमारे भारत मे सभी गर्ब से खुद्को भारतियों केहते हे जो की एक बोहत अच्छी बात हे। लेकिन भारतियों होने के नाते हम अपना कर्तब्य भूल जाते हे। हम pipeline से पानी लेते बक्त नल के ढक्कन खुला छोड़ देते हे, रास्ते मे पाइप मे पानी निकलकर बेह जाते हे लेकिन सरकार के ऑफीस मे जाकर समस्या नेही बताते, बर्तन धोने का पानी, नहाने का पानी को ठीक से इस्तेमाल नेही करते। जैसे हम सभी पानी बर्बाद करने की कम्पटीशन मे लगा हुआ हे। ये छोटी छोटी अदते हमें ठीक करना ही पड़ेगा। हमें पानी कभी भी बर्बाद नेही करना चाहिए।
Water Crisis in India - जल संकट समस्या हिंदी मे
साल 2020 तक भारत का 21 शेहर ग्राउंड वाटर मुक्त हौ जाएगी।
हमारे देश मे पानी की कमी नेही हे। हर साल बोहत बारिश होता हे बाढ़ भी होता। कमी हे तो पानी संग्रह की टेक्नॉलजी और शिक्षा की। हमें पानी संग्रह करना ही पड़ेगा। और साथ ही साथ नदी और तालाबो को बचाना पड़ेगा। क्यूँ की बाड़ति आबादी और नगराायन की बजेह से बोहत बुरी effect नदी और तालाबो पर पढ़ रहा हे। नेही तो कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच मे जो हुआ था बो फिर से हौ सकता हे।
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