Bad effect of firecrackers - क्या दिपावली पर पठाखे जालाना सही हे?


क्या अताशबजी फोड़ने से बड़ रहा है अस्थमा के मरीजों की संख्या?

क्या अताशबजी फोड़ने से बड़ रहा है अस्थमा के मरीजों की संख्या?

आप एक बात जरा ध्यान से हर साल देखेंगे तो अपको पता लगेगा दीवाली के बाद श्वास लेने में दिक्कत होने वाली लोगों की संख्या अचानक से बड़ जाती है। जिसे हम कहते है अस्थमा के मरीज। अपको ऐसा बोहोत सारे लोगों को मिलेगा जिसको कभिभी श्वास लेने में दिक्कत नहीं हुआ उसकी भी श्वास लेने मे दिक्कत हो रही है। और जिसको पहले से अस्थमा, COPD (Chronic Obstructive Pulmonary Disease) है उन्मेषे बोहतो को Hospital लेकर जाना पड़ रहा है। ऐसा होने का एक बोहोत बड़ा कारण है बाजी फोड़ने के बाद हबा में तैरती धूल का परिमाण बढ़ जाती है। और बो धूल श्वास लेने के वक्त हमारी फेफड़ों के अंदर पहुंच जाती है। जिसके कारण हमें सीओपीडी और अस्थमा जैसे रोग होती है। इसके अलावा नाक का अंदर जलन और खांशी भी होती है।

अस्थमा और सीओपीडी होने के पीछे जो चीज सबसे बड़ा भूमिका निभाते है बो है सालफर डाई - ऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड और ओजन। इन्मेषे अजोन को छोड़कर बाकी दो का परिमाण दीपावली के बाद बोहोत बड़ जाती है।

बिपद का आशंका हाबा में तैरती धुलिकना से भी होता है। क्यूं की ये सिर्फ फेफड़ों तक नहीं पहंचती। ये किसिभी तरह से आपके दिमाग और हार्ट तक पहुंच सकती है। जिसके कारण आपका हार्ट अटैक भी हो सकता है। इसलिए बाजी फोड़ने से सिर्फ आपका फेफड़ों ही नहीं आपका हार्ट और दिमाग पर भी इसका बुरी प्रभाव पड़ सकती है। इस बायू दूषण का सबसे बुरा प्रभाव बच्चो पर ही दिखाई देती है।
अब ये सारी समस्या का एक बड़ी कारण है सरकार सिर्फ शब्द बाजी पर ही ध्यान दे रही है, अताशबाजी पर उतना ध्यान नहीं दे रही है। ऐसे में शब्द बाजी के खिलाफ तो प्रचार हो रही हे लेकिन अताशबजि फोड़ने के खिलाफ ज्यादा प्रचार नहीं हो रहा है। जिसके कारण लोग शब्द बाजी फोड़ना छोड़कर अतशबजी फोड़ रहे है। लोगों मै जागरूकता ना होने की कारण ऐसा हो रहे है। और ये जागरूकता लाने की काम हमारे, आपका और सरकार का हे। क्यूं की शब्द बाजी के जैसा प्रदूषण आताशबाजी से भी फैलता है। अगर आब नहीं किया तो हमे बोहत् देर हो जायेगा। हमे कैसे भी करके शब्द और आताशबजी के खिलाफ लोगों को जागरूक करना पड़ेगा।


आप दीपावली जरूर मनाइए इससे कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन जितना हो सके उतना कम बाजी फोड़कर ही मनाइए। दीपावली दीप का उत्सव है आप मिट्टी के दीप जलाकर दीवाली को मनाने की कोशिश कीजिए। ये बात हमेशा याद रखिए दीपावली उत्सव होने का असली कारण है अंधकार के ऊपर आलो का विजय मनाना। बुराई के ऊपर अच्छाई का जीत होना। और ये अंधकार हे अशिक्षा और आलो है ज्ञान यानी शिक्षा। श्री राम ने रावण को बध करके बुराई और अंधकार पर अपना जीत हासिल किया था। जिस दिन हमने अशिक्षा के खिलाफ जीत हासिल करेंगे उस दिन हमने सही मायने में अंधकार के ऊपर जीत हासिल करेंगे।

क्या अताशबजी फोड़ने से बड़ रहा है अस्थमा के मरीजों की संख्या?

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